
कोल्हापुर में एक दर्दनाक घटना ने सबको स्तब्ध कर दिया है। महिला पुलिस अधिकारी अश्विनी बिद्रे की हत्या के मामले में दस साल गुजर चुके हैं, लेकिन न्याय का इंतजार आज भी जारी है। परिजनों ने अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुख्य न्यायाधीश से इच्छामृत्यु की अनुमति मांग ली है।
परिवार का आरोप है कि अदालत ने हत्या साबित होने के एक साल बाद भी प्रशासन मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं कर रहा। इससे सेवा कालीन लाभ, पेंशन और बैंक लॉकर का पैसा तक नहीं मिल पा रहा। अश्विनी के पति राजू गोरे ने बताया कि नवी मुंबई पुलिस से बार-बार मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
‘सरकार ने जो सुविधाएं देनी थीं, एक भी नहीं दीं। हमारा बैंक लॉकर लॉक है, पैसा अंदर कैद है। किसी विभाग ने हमारी नहीं सुनी, इसलिए राष्ट्रपति और सीजेआई को प्रार्थना पत्र लिखा है। हमारी इच्छामृत्यु मंजूर कर दें,’ गोरे ने कहा।
अश्विनी बिद्रे को मेहनती और सच्ची अधिकारी के रूप में जाना जाता था। उनकी हत्या ने महाराष्ट्र पुलिस में भ्रष्टाचार और जांच की खामियों को उजागर किया। यह मामला पूरे राज्य में सनसनी बन गया था।
परिजनों की यह गुहार प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े करती है। क्या शीर्ष पदाधिकारी इस पर तुरंत ध्यान देंगे? यह देखना दिलचस्प होगा। न्याय व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत है ताकि ऐसे परिवारों को इंसाफ मिले।