
आई-पैक छापेमारी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की है। एजेंसी ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार को हटाने की तत्काल मांग की है, उन पर केंद्रीय एजेंसी के ऑपरेशनों में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है।
यह मामला तृणमूल कांग्रेस से जुड़े चुनावी रणनीतिकार आई-पैक के दफ्तरों पर ईडी की छापेमारी से उपजा है। 2024 लोकसभा चुनावों में कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत ये छापे मारे गए थे, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं के दस्तावेज बरामद हुए।
ईडी अधिकारियों के अनुसार, डीजीपी राजीव कुमार ने खुद हस्तक्षेप किया, राज्य पुलिस को तैनात कर खोजबीन रोकी और ईडी टीमों को हिरासत में लिया। यह टकराव राज्य सरकार और केंद्र की जांच एजेंसियों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करता है।
याचिका में राज्य तंत्र द्वारा आई-पैक कर्मियों को पूछताछ से बचाने के कई उदाहरण दिए गए हैं। यह दावा किया गया कि डीजीपी के बने रहने से गौ-तस्करी, कोयला घोटाले और चुनावी फंड डायवर्जन की करोड़ों की जांच प्रभावित हो रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप कर केंद्र एजेंसियों को राज्य हस्तक्षेप से मुक्त रखना होगा। बंगाल के कानून मंत्री ने इसे ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’ बताया।
याचिका लिस्टिंग का इंतजार है। क्या सुप्रीम कोर्ट चिट फंड मामले की तरह डीजीपी हटाने का आदेश देगा? इसका फैसला बंगाल की कानून-व्यवस्था और टीएमसी की चुनावी तैयारियों को नया मोड़ दे सकता है।