
नई दिल्ली में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को बीमार पत्नी की देखभाल के लिए मिली दो सप्ताह की अंतरिम जमानत पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कड़ा ऐतराज जताया है। एजेंसी को शक है कि इस राहत से सिद्दीकी जांच के गवाहों पर असर डाल सकते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में जल्द याचिका दायर की जाएगी।
शनिवार को ट्रायल कोर्ट ने यह जमानत देते हुए ईडी की दलीलों को ठीक से नहीं सुना, ऐसा एजेंसी का मानना है। सिद्दीकी ने कोर्ट को गुमराह किया कि यूएई में रहने वाले उनके तीन बच्चे ईरान संघर्ष से उड़ानों बाधित होने के कारण मां की देखभाल के लिए भारत नहीं आ सकते।
18 नवंबर 2025 को धन शोधन मामले में गिरफ्तार सिद्दीकी पर फरीदाबाद यूनिवर्सिटी की प्रमुख संस्थानों द्वारा कथित फर्जी मान्यता के दावों और वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप है। यह जांच 10 नवंबर 2025 के रेड फोर्ट धमाके से जुड़े ‘व्हाइट कॉलर टेरर’ नेटवर्क से लिंक है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी ने 1 लाख रुपये के बॉन्ड पर जमानत दी। कोर्ट ने बच्चों के यात्रा बाधा के तर्क को माना। ईडी ने मानवीय आधार पर विरोध किया, कहा पत्नी की हालत स्थिर है और 2024 से इलाज चल रहा।
ईडी ने पहले बताया कि यूनिवर्सिटी ने झूठे दावों से 45 करोड़ की कमाई की। जनवरी में 139.97 करोड़ की संपत्ति कुर्क की। परिवारिक संस्थाओं से धन घुमाया गया, विदेश रेमिटेंस भी।
दिल्ली पुलिस ने 27 जनवरी को दो एफआईआर दर्ज कीं, यूजीसी शिकायत पर धोखाधड़ी के आरोप। सिद्दीकी उस मामले में हिरासत में हैं। यह केस जांच और मानवीय पक्ष के बीच टकराव दिखाता है।