
गुरुग्राम से बड़ी खबर सामने आई है, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड से जुड़े बहुकरोड़ी बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कंपनी के पूर्व रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) अरविंद कुमार को गिरफ्तार कर लिया। दिसंबर 2018 से जून 2025 तक इस पद पर तैनात कुमार को 3 फरवरी 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया।
कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें 8 दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया गया। इससे पहले इस केस में कंपनी के पूर्व प्रमोटर और निलंबित एमडी संदीप गुप्ता को भी इसी कानून के تحت गिरफ्तार किया जा चुका है। ईडी की यह जांच सीबीआई की एफआईआर पर आधारित है, जिसमें आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत 2015-2018 के बीच सार्वजनिक बैंकों को 236 करोड़ रुपये का चूना लगाने का आरोप है।
जांच में सामने आया कि कुमार ने आरपी के पद का दुरुपयोग कर कंपनी के फंड्स को निजी हित में हस्तांतरित किया। उनके कार्यकाल में भारी रकम को लेयरिंग के जरिए करीबियों की फर्मों में भेजा गया, जो बाद में उनके व्यक्तिगत खातों में लौट आई। बैंक रिकॉर्ड्स में 80 लाख से ज्यादा संदिग्ध कैश डिपॉजिट और 1 करोड़ से अधिक ट्रांसफर दर्ज हैं।
ईडी के अनुसार, यह मूल धोखाधड़ी की ‘अपराध आय’ थी, जिसे सीआईआरपी के वैध लेन-देन के रूप में छिपाया गया। इससे बैंकों को 94% नुकसान हुआ, परिसमापन के बाद 708 करोड़ के दावों पर महज 40 करोड़ मिले। आईबीबीआई ने पहले ही कुमार का आरपी रजिस्ट्रेशन 2 साल के लिए सस्पेंड कर दिया था।
ईडी ने चेतावनी दी कि दिवालिया प्रक्रिया का ऐसा दुरुपयोग कर्ज वसूली और जनता के विश्वास को चोट पहुंचाता है। आगे की तफ्तीश में पूरे मनी ट्रेल और सभी आरोपी की भूमिका का पता लगाया जाएगा।