
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने दो जिलों की सुस्त गति पर कड़ा रुख अपनाया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय को भेजे गए संदेश में आयोग ने प्रगति की कमी पर असंतोष जताया है, जो चुनावी प्रक्रिया में बाधा बन सकता है।
पिछले सप्ताह दिल्ली स्थित आयोग मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने वर्चुअल माध्यम से राज्य के जिला स्तरीय निर्वाचन अधिकारियों, आईएएस अफसरों और पुलिस महकमे के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस दौरान विभिन्न जिलों में मतदाता सूची, बूथ व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की स्थिति की गहन पड़ताल हुई।
सीईओ कार्यालय के करीबी स्रोतों के मुताबिक, प्राप्त जानकारियों की समीक्षा में कई कमियां सामने आईं। होली के अवकाश के बावजूद बुधवार रात चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जिला मजिस्ट्रेट समेत अधिकारियों के संग संक्षिप्त ऑनलाइन चर्चा की। उन्होंने दक्षिण 24 परगना और एक अन्य जिले में प्रगति की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जाहिर की।
गुरुवार को एक और वर्चुअल बैठक निर्धारित है, जिसमें तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने की संभावना है। आयोग की पूर्ण बेंच 8 मार्च रात कोलकाता पहुंचेगी। 9 और 10 मार्च को मतदाता दस्तावेजों में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ वाली न्यायिक जांच और समग्र तैयारियों पर लंबी बैठकों का आयोजन होगा।
इधर, सीपीआई-एम के नेता व कार्यकर्ता बुधवार शाम से केंद्रीय कोलकाता में सीईओ कार्यालय के बाहर धरने पर हैं। उनका कहना है कि न्यायिक जांच पूरी होने और वास्तविक मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहने तक चुनाव तिथि घोषित न हो। धरना गुरुवार सुबह भी जारी है। नेता मनोज कुमार अग्रवाल से मुलाकात की मांग पर अड़े हैं।
अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को जारी हुई, जिसमें जांचाधीन नाम शामिल नहीं हैं। प्रक्रिया के अनुरूप पूरक सूचियां बाद में आएंगी। यह घटनाक्रम बंगाल की चुनावी जंग को और रोचक बना रहा है।