
कोलकाता: पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के कथित पोते चंद्र कुमार बोस से जुड़े दावों को पूरी तरह भ्रामक करार दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के दावों का कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है और इन्हें चुनावी माहौल में फैलाने से बचना चाहिए।
चुनावी मैदान में उतरने के बाद चंद्र कुमार बोस के इन दावों ने राजनीतिक घमासान मचा दिया। विपक्षी दल इसे हवा देने में जुट गए, लेकिन आयोग ने तुरंत हस्तक्षेप कर इसे खारिज कर दिया। आयोग का कहना है कि व्यक्तिगत दावों का चुनावी प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्वतंत्रता संग्राम के महानायक हैं। आजाद हिंद फौज के संस्थापक के रूप में उनकी स्मृति लाखों दिलों में बसी है। उनके परिवार से जुड़े विवादों को चुनावी हथियार बनाने की कोशिश निंदनीय है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की सरगर्मी तेज है। आयोग ने सभी दलों को नीतिगत मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है। ‘भ्रामक जानकारी लोकतंत्र के लिए खतरा है,’ आयोग के एक अधिकारी ने कहा।
बोस परिवार में वर्षों से यह विवाद चला आ रहा है। कुछ सदस्य चंद्र कुमार को स्वीकार करते हैं, तो कुछ इनकार। लेकिन आयोग ने साफ लकीर खींच दी है- चुनाव परिवारिक झगड़ों का मंच नहीं।
यह घटना राजनीति में ऐतिहासिक हस्तियों के नाम का दुरुपयोग रोकने का संकेत है। वोटरों को विकास, रोजगार और सुशासन जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। आयोग की यह मुद्रा चुनावी प्रक्रिया को मजबूत बनाएगी।