
पश्चिम बंगाल में राज्य नवाचार एवं अनुसंधान (SIR) योजना के तहत डेटा-एंट्री ऑपरेटरों की कथित अनियमित नियुक्ति को लेकर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपना लिया है। आई-पैक सेंटर्स में स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया पर लगातार शिकायतें मिल रही हैं, जिसमें राजनीतिक संरक्षण और पैसे के लेन-देन का आरोप है।
हजारों नौकरी के इच्छुकों ने आरोप लगाया है कि योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को नौकरी थमा दी गई। चुनाव आयोग को सौंपी गई शिकायतों में फर्जी दस्तावेजों और चयन सूची में गड़बड़ी के सबूत संलग्न हैं। आयोग ने तत्काल जांच शुरू कर दी है और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए, जिनमें नियुक्त कर्मचारियों की अयोग्यता साफ झलक रही है। विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार का नंगा नाच बता रहे हैं और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘सरकारी भर्ती में पारदर्शिता सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।’ जांच में यदि अनियमितताएं पाई गईं तो नियुक्तियां रद्द हो सकती हैं और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
बंगाल में बेरोजगारी की मार झेल रहे युवाओं के लिए यह जांच उम्मीद की किरण है। आयोग की सख्ती से भविष्य में ऐसी भर्तियों पर अंकुश लग सकता है, जिससे मेरिट-आधारित चयन सुनिश्चित होगा।
