
नई दिल्ली में 77वें गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर कर्तव्य पथ और भारत पर्व में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अपने स्वदेशी नवाचारों से देश को प्रभावित करने को तैयार है। राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने वाली ये प्रणालियां लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (एलआर-एएसएचएम) और ‘लड़ाकू पनडुब्बियों के लिए नौसेना प्रौद्योगिकियां’ झांकी हैं।
परेड में लॉन्चर सहित एलआर-एएसएचएम का प्रदर्शन होगा, जो भारतीय नौसेना की तटीय जरूरतों के लिए विकसित है। स्वदेशी एवियोनिक्स और सेंसर से लैस यह पहली हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल स्थिर-गतिशील लक्ष्यों को चीरने में सक्षम है। दो चरणीय ठोस प्रणोदन से मैक 10+ गति पाकर यह अर्ध-बैलिस्टिक पथ पर कई स्किप्स के साथ औसत मैक 5 बनाए रखती है। कम ऊंचाई पर उड़ान से दुश्मन रडार इसे पकड़ नहीं पाते।
26 से 31 जनवरी तक लाल किले के भारत पर्व में डीआरडीओ झांकी पनडुब्बी प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित होगी। इंटीग्रेटेड कॉम्बट सूट (आईसीएस), वायर गाइडेड हैवी वेट टॉरपीडो (डब्ल्यूजीएचडब्ल्यूटी) और एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) पानी के नीचे वर्चस्व सुनिश्चित करेंगी।
आईसीएस खतरे की पूरी तस्वीर देकर हथियार चयन-मार्गदर्शन सक्षम बनाती है। आठ डीआरडीओ लैब्स और 150+ उद्योगों का सहयोग। डब्ल्यूजीएचडब्ल्यूटी समुद्री खतरों का सामना करेगी, नौसेना के ब्लू वाटर विस्तार के लिए। एआईपी फॉस्फोरिक एसिड फ्यूल सेल से शांत डुबकी बढ़ाएगी, मॉड्यूलर डिजाइन भविष्य के लिए।
सशस्त्र बल अर्जुन टैंक, नाग, ब्रह्मोस आदि दिखाएंगे। डीआरडीओ आत्मनिर्भर भारत को मजबूत कर रहा है।