
कोलकाता, 20 जनवरी। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर भाजपा नेता दिलीप घोष ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जनता को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन पूरी प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए।
घोष ने माध्यमिक प्रवेश पत्र को आयु प्रमाण के रूप में मान्य करने के विवाद पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह दस्तावेज पहले स्वीकार्य था, फिर अमान्य कर दिया गया और अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुनः मान्य है। इन बार-बार बदलावों से मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है, क्योंकि उन्हें एक ही कागजात बार-बार जमा करने पड़ रहे हैं।
‘घबराएं नहीं, ऐसा पहले भी हुआ है। मुझे पता है कि एक बूथ से 350 नोटिस जारी हुए, जबकि उसी बूथ पर भाजपा को 450 वोट मिले। इससे आम लोगों में सवाल उठ रहे हैं,’ घोष ने कहा।
टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए घोष ने जोर दिया कि भाजपा चाहती है कि मतदाता सूची में केवल वास्तविक पात्र व्यक्ति ही रहें। जिनके पास आवश्यक दस्तावेज नहीं, उन्हें हटाया जाए, लेकिन जनता को कोई परेशानी न हो। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर सुचारू रूप से चल रही है, लेकिन टीएमसी बाधा डाल रही है।
घोष ने बीएलओ और भाजपा कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई। ‘शिकायत करने वालों पर भी हमले हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में निष्पक्ष चुनाव कैसे संभव?’ उन्होंने सवाल किया।
हालांकि, चुनाव आयोग के निरंतर प्रयासों से चुनाव साफ-सुथरे होंगे, ऐसा उनका विश्वास है। बंगाल की राजनीति में एसआईआर एक बड़ा मुद्दा बन गया है।