
राष्ट्रीय राजधानी के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश में साइबर अपराधियों ने एक और बड़ा वार किया है। एक सफल महिला व्यवसायी को चतुराई भरी ठगी के जाल में फंसाकर 7 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो गया। यह घटना डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे को उजागर करती है।
पीड़िता, जो शहर में कई बिजनेस चला रही हैं, को एक निजी बैंक के अधिकारी बनकर फोन आया। ठगों ने खाते में संदिग्ध गतिविधि का हवाला देकर फोन पर ही पैसे ट्रांसफर करने को कहा। नकली दस्तावेज और वेबसाइट दिखाकर उन्हें भरोसा दिलाया गया।
कई दिनों तक चले इस जाल में उन्होंने व्यवसायिक और निजी खातों से बड़ी-बड़ी रकम भेज दी। जैसे ही सच्चाई का पता चला, पैसे गायब हो चुके थे। मनी ट्रेल कई राज्यों में फैल गया था।
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने तुरंत एक्शन लेते हुए कई खाते फ्रीज कराए। विदेशी सर्वरों तक पहुंच बनाई जा रही है। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस तरह के हाई-वैल्यू फ्रॉड में 40 प्रतिशत इजाफा हुआ है।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि एआई टूल्स से बनाई गई फेक वॉयस और साइट्स से कोई भी सुरक्षित नहीं। बैंकों से सीधी जांच और टू-फैक्टर सिक्योरिटी जरूरी।
यह मामला पूरे व्यापार समुदाय में सनसनी फैला रहा है। सख्त साइबर कानूनों और जागरूकता अभियानों की मांग तेज हो गई है। पीड़िता को न्याय मिले, यही प्रार्थना है।