
दिल्ली विधानसभा में हंगामा चरम पर पहुंच गया है। विपक्ष के उपनेता मुकेश अहलावत ने स्पीकर से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सदन में बार-बार हो रहे हंगामों और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती बरतने का आग्रह किया।
अहलावत ने अपने संबोधन में कहा कि सदन की गरिमा को बनाए रखने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे। विपक्ष का आरोप है कि सत्ताधारी सदस्य सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं और असंसदीय व्यवहार कर रहे हैं। यह मांग आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए की गई है।
सदन की बैठकों में हाल के दिनों में शोरशराबा और वाकआउट आम हो गए हैं। अहलावत का यह बयान विपक्ष की रणनीति का हिस्सा लगता है, जिससे जनता का ध्यान सरकार की कमियों पर केंद्रित हो। सत्ताधारी दल ने इसे राजनीतिक ड्रामा करार दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि स्पीकर का जवाब सदन के भविष्य को प्रभावित करेगा। यदि निलंबन या अन्य सजाएं हुईं, तो यह नजीर बनेगा। दिल्ली की राजनीति हमेशा से गरम रही है, और यह घटना उसकी मिसाल है।
सदन में संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है, खासकर जब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहें। विपक्ष उम्मीद कर रहा है कि यह मुद्दा जनसमर्थन जुटाने में मददगार साबित होगा। आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी।