
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण और कड़ाके की ठंड ने लोगों को घरों में कैद कर दिया है। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 450 से ऊपर पहुंच गया है, जो ‘गंभीर श्रेणी’ में आता है। ठंड ने न्यूनतम तापमान को 4 डिग्री सेल्सियस तक ला खड़ा किया है।
घने कोहरे ने हवाई अड्डों पर उड़ानों को प्रभावित किया, जबकि सड़कों पर दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी है। अस्पतालों में सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।
ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के चौथे चरण के तहत स्कूल बंद कर दिए गए हैं, निर्माण कार्य रुके हुए हैं और निजी वाहनों पर पाबंदी लगाई गई है। पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने और वाहनों के धुएं को प्रदूषण का मुख्य कारण बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों ने लोगों से घर में रहने, मास्क पहनने और एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करने की सलाह दी है। लंबे समय के समाधान के रूप में इलेक्ट्रिक वाहनों और वैकल्पिक फसल प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। एनसीआरवासी इस दोहरी मार से जूझ रहे हैं, उम्मीद है जल्द राहत मिलेगी।