
राजधानी दिल्ली में मुस्लिम बहुल इलाकों को निशाना बनाए जाने का गंभीर आरोप लगाते हुए कासिम रसूल इलियास ने आवाज बुलंद की है। उनके बयान ने पूरे शहर में बहस छेड़ दी है और सामुदायिक सद्भाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इलियास ने बताया कि ये इलाके बार-बार पुलिस कार्रवाई, अतिक्रमण हटाओ अभियान और निगरानी के दायरे में आ रहे हैं। ‘यह संयोग नहीं, सुनियोजित प्रयास है,’ उन्होंने कहा, अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की।
ओखला, जामिया नगर और शाहीन बाग जैसे क्षेत्रों के निवासियों ने अपनी आपबीती सुनाई। दुकानदारों का कहना है कि लगातार चेकिंग से उनका कारोबार चरमरा गया है। युवा पीढ़ी में भय का माहौल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कानून व्यवस्था जरूरी है, लेकिन भेदभावपूर्ण तरीके से नहीं। राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा गरमाता जा रहा है, विपक्ष हमलावर रुख अपना रहा है।
सिविल सोसाइटी संगठन पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। दिल्ली प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।
कासिम इलियास का यह बयान अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा का संदेश देता है, जो दिल्ली जैसे महानगर के लिए अनिवार्य है।