
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को चीनी वीजा घोटाले के मामले में कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदंबरम की याचिका पर महत्वपूर्ण कदम उठाया। अदालत ने सीबीआई को नोटिस जारी कर ट्रायल कोर्ट के आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर जवाब मांगा है।
जस्टिस मनोज जैन की एकलपीठ ने न केवल मुख्य आपराधिक पुनरीक्षण याचिका बल्कि ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने की अंतरिम अर्जी पर भी नोटिस जारी किया। यह मामला 2011 के कथित वीजा अनियमितताओं से जुड़ा है जिसमें चीनी नागरिकों के वीजा का दुरुपयोग किया गया था।
कार्ति के वकील सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने तर्क दिया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8 व 9 के लिए आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी सरकारी कर्मचरी की संलिप्तता के ये धाराएं लागू नहीं हो सकतीं। साथ ही आईपीसी धारा 204 के आरोप बिना सहायक साक्ष्य के तय करना गलत है।
जब रोक की मांग की गई तो अदालत ने कहा कि सीबीआई के जवाब के बाद ही अंतरिम राहत पर विचार होगा। जस्टिस जैन ने मामले को 12 फरवरी के लिए सूचीबद्ध किया, जहां सीबीआई को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
इससे पूर्व कई जजों ने सुनवाई से खुद को अलग किया था। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा, अनूप जयराम भंभानी व गिरीश कथपालिया ने याचिका से इनकार कर दिया था। विशेष सीबीआई कोर्ट ने 23 दिसंबर को कार्ति समेत कई पर साजिश व रिश्वत के आरोप तय किए थे, जबकि चेतन श्रीवास्तव को बरी किया।
सीबीआई के अनुसार, वेदांता समूह की तलवंडी साबो पावर लिमिटेड ने पंजाब के मनसा में पावर प्रोजेक्ट के लिए 250 चीनी मजदूरों के वीजा नियमों का उल्लंघन कर बढ़ाए थे। यह फैसला राजनीतिक व कॉरपोरेट जगत में चर्चा का विषय बनेगा।