दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति घोटाले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अलग से सुनवाई की मांग पर सीबीआई और ईडी को नोटिस जारी कर दिया है। आप नेता ने अपनी याचिका में कहा कि सह-अभियुक्तों से अलग उनका मामला सुना जाना चाहिए, क्योंकि वे एक चुने हुए प्रतिनिधि हैं।

कोर्ट में पेश हुए केजरीवाल के वकीलों ने प्रक्रियागत खामियों का हवाला देते हुए कहा कि सामूहिक सुनवाई से उनका बचाव प्रभावित होगा। जस्टिस विभू बखरू और आकार्शण दुआ की बेंच ने जांच एजेंसियों को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। यह फैसला उस समय आया जब केजरीवाल की अंतरिम जमानत खत्म होने के बाद वे फिर से हिरासत में हैं।
2021-22 की आबकारी नीति में कथित भ्रष्टाचार के आरोप हैं, जिसमें शराब लाइसेंसिंग में अनियमितताएं और करोड़ों के कमीशन शामिल हैं। इससे पहले मनीष सिसोदिया समेत कई आप नेता गिरफ्तार हो चुके हैं।
आप ने इसे केंद्र की साजिश करार दिया, जबकि भाजपा ने इसे देरी का हथकंडा बताया। अगली सुनवाई में एजेंसियों के जवाब से मामले में नया मोड़ आ सकता है। दिल्ली की राजनीति में यह लड़ाई चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर रही है।
