
नई दिल्ली। महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा को दिल्ली हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के संबंध में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज होने के पीछे की परिस्थितियां और जांच की मौजूदा स्थिति जानना आवश्यक है। पुलिस को शीघ्र जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया।
अलका लांबा ने याचिका में दावा किया कि यह मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और आरोप तथ्यों पर टिके नहीं। इसे रद्द करने की मांग की गई।
कोर्ट ने सभी पक्षकारों को सुनने के बाद ही फैसला लेने का भरोसा दिलाया। फिलहाल केवल नोटिस जारी कर जानकारी मांगी गई।
यह विवाद 2024 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण लागू करने के प्रदर्शन से जुड़ा। राउज एवेन्यू कोर्ट ने मार्च 2024 में आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए समन जारी किया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार के आदेश को सही ठहराया, जिसमें लोक सेवकों पर हमला, कर्तव्य में बाधा और आदेश की अवहेलना के आरोप तय किए गए।
अभियोजन ने बताया कि जंतर-मंतर क्षेत्र में निषेधाज्ञा के बावजूद प्रदर्शन हुआ और संसद मार्च की इजाजत नहीं थी। हाईकोर्ट का यह कदम मामले को नई दिशा दे सकता है।
पुलिस के जवाब का इंतजार है, जो राजनीतिक आंदोलनों पर कानूनी कार्रवाई के मानदंड तय कर सकता है।