
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का संकट गहराता जा रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट संकल्प जताया है कि उनकी सरकार पूरे वर्ष भर, हर दिन प्रदूषण नियंत्रण के लिए मुस्तैद रहेगी। एक महत्वपूर्ण पर्यावरण बैठक में बोलते हुए गुप्ता ने कहा कि दिल्ली प्रशासन में कोई छुट्टी या ब्रेक नहीं है—सातों दिन, बारहों महीने सक्रियता बरकरार।
वर्तमान में एQI स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गया है, जहां पराली जलाने, वाहनों के धुएं और निर्माण धूल मुख्य दोषी हैं। गुप्ता ने बहुआयामी रणनीति का जिक्र किया, जिसमें ऑड-ईवन योजना का सख्ती से पालन, शहरभर में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापना और अवैध निर्माण पर कार्रवाई शामिल है।
‘हम सर्दियों का इंतजार नहीं करते; हमारी टीमें 24 घंटे अलर्ट पर हैं,’ उन्होंने जोर देकर कहा। हालिया उपलब्धियों में औद्योगिक उत्सर्जन में 20 प्रतिशत कमी, इलेक्ट्रिक बसों का flota विस्तार और 5,000 से अधिक जुर्माने प्रमुख हैं। उन्होंने पंजाब-हरियाणा से फसल अवशेष प्रबंधन में तेजी की अपील की।
विपक्ष के निष्क्रियता के आरोपों का जवाब देते हुए गुप्ता ने डेटा पेश किया—10,000 हेक्टेयर वृक्षारोपण और GRAP उपायों की सफलता। दिवाली से पहले पटाखों पर सख्ती और ‘हरित पटाखे’ विकल्पों की घोषणा भी की। विशेषज्ञ सहमत हैं कि दीर्घकालिक उपाय जैसे मेट्रो विस्तार जरूरी हैं।
दिल्लीवासियों को उम्मीद है कि यह अटूट सक्रियता श्वास लेने लायक हवा लाएगी। जलवायु परिवर्तन के दौर में यह प्रतिबद्धता शहरी प्रदूषण युद्ध को नई दिशा दे सकती है।