
दिल्ली की एक अदालत ने जनकपुरी में हुई बाइक सवार युवक की मौत के मामले में आरोपी राजेश कुमार की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। 6 फरवरी 2026 की रात दिल्ली जल बोर्ड के ठेकेदारों द्वारा खोदे गए 15-20 फुट गहरे गड्ढे में 25 वर्षीय कमल ध्यानी की दर्दनाक मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम में दम घुटने के साथ शरीर पर जलने के निशान और छाती पर दबाव के सबूत मिले।
कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता पर चिंता जताई। खुले गड्ढे पर बैरिकेडिंग या चेतावनी के अभाव में सुरक्षा लापरवाही साफ नजर आ रही है। जांच प्रारंभिक अवस्था में है। गवाहों के बयान बाकी हैं, खुदाई की अनुमति, सुरक्षा मानकों का पालन, अनुबंध शर्तें आदि की पड़ताल जारी है।
आरोपी को जमानत देने से गवाहों पर दबाव, सबूतों के साथ छेड़छाड़ या भागने का डर है। भले ही राजेश का कोई पुराना अपराधिक रिकॉर्ड न हो और वह इलाके का निवासी हो, लेकिन अपराध की प्रकृति और जनहित को प्राथमिकता दी गई। सरकारी प्रोजेक्ट्स में लापरवाही से मौत के केस में व्यक्तिगत आजादी और निष्पक्ष जांच का संतुलन जरूरी बताया गया।
वकीलों ने गिरफ्तारी को गैरकानूनी ठहराया। 6 फरवरी को हिरासत में लेने के बावजूद 8 फरवरी को कोर्ट पेशी हुई, जो कानून और संविधान के अनुच्छेद 22(2) का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का जिक्र किया। कोर्ट ने इस बिंदु पर फैसला टाल दिया और जनकपुरी थाने के एसएचओ को 6-8 फरवरी के सीसीटीवी के साथ जवाब दाखिल करने को कहा। सुनवाई 16 फरवरी 2026 को दोपहर 2 बजे।
5 फरवरी को डीजेबी ने सीवर कार्य के लिए गड्ढा खोदा, लेकिन कोई सुरक्षा नहीं। रात में कमल बाइक से गिर पड़े। सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश ने देखा लेकिन सूचना नहीं दी। सुबह राहगीर ने शव पाकर पुलिस बुलाई। 7 फरवरी को गिरफ्तारी हुई। यह घटना शहरी विकास में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करती है।