
केरल में सत्तारूढ़ माकपा ने मीडिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में हाल के सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को धार्मिक संघर्ष के रूप में तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। पार्टी का दावा है कि यह जानबूझकर की गई सनसनीखेज रिपोर्टिंग है जो समाज को बांटने का काम कर रही है।
थिरुवनंतपुरम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में माकपा के वरिष्ठ नेता कोडपाकोण्डा रवि ने कहा, ‘मीडिया ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दंगों का रंग दे दिया। हमारा संघर्ष सांप्रदायिकता के खिलाफ था, न कि किसी धर्म के विरुद्ध।’ उन्होंने टीवी चैनलों के हेडलाइंस और क्लिप्स के उदाहरण दिए जहां मामूली झड़पों को बड़े धार्मिक दंगे के रूप में दिखाया गया।
केरल का राजनीतिक माहौल हमेशा से वैचारिक टकराव का केंद्र रहा है। एलडीएफ सरकार पर भाजपा और कांग्रेस दोनों तरफ से हमले हो रहे हैं। माकपा का कहना है कि मीडिया कुछ चैनलों के माध्यम से भाजपा की कम्युनल एजेंडे को बढ़ावा दे रहा है। पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी ने भी इसकी निंदा की है।
प्रदर्शनों के प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि ये आंदोलन भूमि अधिकारों और आर्थिक असमानताओं पर केंद्रित थे। पुलिस रिपोर्ट्स में भी कोई बड़े धार्मिक हिंसा का उल्लेख नहीं है। फिर भी, ऑनलाइन पोर्टल्स ने अफवाहें फैलाईं। माकपा ने प्रभावित मीडिया हाउसेज को कानूनी नोटिस भेजने का ऐलान किया है।
यह पहली बार नहीं है जब केरल मीडिया पर पक्षपातपूर्ण कवरेज का आरोप लगा हो। पिछले साल छात्र आंदोलनों के दौरान भी ऐसा हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉर्पोरेट मालिकाना हक संपादकीय स्वतंत्रता को प्रभावित कर रहा है।
चुनावों के निकट आते ही यह विवाद और तेज हो सकता है। माकपा सोशल मीडिया और जमीनी अभियानों से जवाब देगी। प्रेस काउंसिल से जांच की मांग की गई है। केरल की सड़कें शांत हैं, लेकिन शब्दों की जंग जारी है। समाज को एकजुट रखने के लिए निष्पक्ष पत्रकारिता जरूरी है।