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कोरल रीफ्स को ‘समुद्री वर्षावन’ कहा जाता है। ये जीवंत संरचनाएं लाखों प्रजातियों का घर हैं, लेकिन कोरल ब्लीचिंग इनकी चमक छीन रही है। जब समुद्री जल का तापमान बढ़ता है, तो कोरल्स अपने भीतर रहने वाले शैवालों को बाहर निकाल देते हैं। ये शैवाल कोरल्स को भोजन और रंग प्रदान करते हैं। बिना इनके कोरल्स भूखे रह जाते हैं और सफेद होकर मरने लगते हैं। हाल के आंकड़े चिंताजनक हैं, जो बताते हैं कि 2050 तक दुनिया के 70-90 प्रतिशत रीफ्स नष्ट हो सकते हैं। ब्लीचिंग से 50 करोड़ लोगों की आजीविका खतरे में है। संरक्षण के प्रयास और ग्लोबल वार्मिंग रोकने के वादे ही अब एकमात्र उम्मीद हैं।

