
गांधीनगर में गुजरात विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही कांग्रेस ने केंद्र सरकार के मनरेगा को हटाकर विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन विधेयक लाने के प्रस्ताव के खिलाफ जोरदार जन आक्रोश सभा का आयोजन किया। यह प्रदर्शन सोमवार को हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में नेता, विधायक, सांसद, किसान, आदिवासी, स्वास्थ्यकर्मी और एनजीओ सदस्य शामिल हुए।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के बैनर तले हुई इस सभा में एआईसीसी महासचिव मुकुल वासनिक ने सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने किसानों की बदहाली, बेरोजगारी की बाढ़, महिलाओं पर अत्याचार और भ्रष्टाचार के बोलबाले का जिक्र किया। ‘भूपेंद्र पटेल और नरेंद्र मोदी की सरकारें सब कुछ होने के बावजूद सो रही हैं,’ उन्होंने कहा।
वासनिक ने आर्थिक नीतियों की भी कड़ी आलोचना की। आत्मनिर्भर भारत के नाम पर अमेरिका पर निर्भरता बढ़ाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने टैरिफ असंतुलन का उदाहरण दिया—अमेरिका ने 18 प्रतिशत टैरिफ लगाया, भारत ने शून्य। गुजरात में सत्ता परिवर्तन तक आंदोलन जारी रहेगा, उनका ऐलान था।
प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने राज्यव्यापी जनसंपर्क अभियान का जिक्र किया, जिसमें सौराष्ट्र, उत्तर-मध्य गुजरात में 5 हजार किलोमीटर की पदयात्राएं शामिल रहीं। युवाओं को नशा, शराब, जाति प्रमाण-पत्रों के बहाने तंग करने और मनरेगा में कमीशनखोरी का आरोप लगाया।
सीएलपी नेता तुषार चौधरी ने पंचायत से संसद तक भ्रष्टाचार का खुलासा किया। वन अधिकारियों द्वारा आदिवासी मजदूरों पर जुल्म की बात कही। पूर्व विधायक महेश वासावा ने जल-जंगल-जमीन आंदोलनों का उल्लेख किया। बनासकांठा सांसद गेनिबेन ठाकोर और विधायक अनंत पटेल ने आदिवासी इलाकों में प्रशासनिक सुस्ती पर चिंता जताई।
पार्टी ने बजट सत्र भर विरोध प्रदर्शन जारी रखने का वादा किया। 2027 चुनाव की तैयारी तेज, राहुल गांधी के प्रचार की उम्मीद। यह सभा कांग्रेस की गुजरात में वापसी की मजबूत कोशिश है।