
मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर हल्ला बोला है। इंदौर में जल आपदा और मनरेगा योजना में किए गए बदलावों को लेकर पार्टी ने मोहन यादव सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का कहना है कि ये दोनों मुद्दे प्रशासनिक लापरवाही और गरीब-विरोधी नीतियों का नंगा चेहरा दिखाते हैं।
इंदौर शहर में मुख्य जल पाइपलाइन फटने से हजारों घरों की पानी आपूर्ति ठप हो गई। गंदे पानी की बाढ़ ने सड़कों को तालाब बना दिया। कई दिनों तक टैंकरों पर निर्भर रहने वाले लोग बीमार पड़ गए। कांग्रेस नेता राकेश सिंह ने कहा, ‘सरकार की उदासीनता ने आमजन को परेशान किया है। दोषियों पर कार्रवाई हो।’
मनरेगा में काम के दिनों को घटाकर और सख्त शर्तें लगाकर ग्रामीणों को परेशान किया जा रहा है। योजना के तहत 100 दिन का काम अब सीमित हो गया। भुगतान में देरी से मजदूर कर्जदार बन रहे हैं। कमल नाथ ने चेतावनी दी, ‘ये गरीबों पर सीधी चोट है, हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।’
कांग्रेस का आरोप है कि इंदौर के जल प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार हुआ। ठेके रिश्तेदारों को दिए गए, जिससे घटिया सामग्री लगी। मनरेगा फंड का दुरुपयोग हो रहा। पार्टी ने विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की है।
भाजपा ने बचाव किया कि मनरेगा सुधारों से पारदर्शिता आएगी और इंदौर की मरम्मत तेजी से हुई। लेकिन जनता का गुस्सा बढ़ रहा है। आगामी चुनावों से पहले ये विवाद सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है।