
राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए नवें बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने इसे अब तक का सबसे फीका और निराश करने वाला बजट करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बजट आंकड़ों की चमक से तो चमक रहा है, लेकिन आम जनता के जीवन में कोई उजाला नहीं ला सका।
पिछले 11 वर्षों में किए गए अनेक वादों को पूरा न करने वाली सरकार ने फिर से भविष्य के लिए घोषणाओं का पुलिंदा थमा दिया। बजट पेश होते ही शेयर बाजार धराशायी हो गया। सेंसेक्स में 2300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और लाखों करोड़ों का निवेश धूल चाट गया।
डांगी ने सदन में कहा कि मोदी सरकार वर्तमान समस्याओं का समाधान 2047 में तलाश रही है। 2014 से 2026 तक की नाकामियां इतनी जमा हो चुकी हैं कि निकट भविष्य का कोई स्पष्ट खाका नहीं बचा। सिर्फ राजनीतिक स्वप्निल घोषणाएं हैं।
देश बेरोजगारी, महंगाई और आय असमानता से जूझ रहा है। युवाओं के लिए स्टार्टअप और स्किलिंग की बातें हो रही हैं, लेकिन स्थायी रोजगार कहां बने? एमएसएमई, ऑरेंज इकोनॉमी, एनिमेशन से नौकरियां देने का दावा खोखला है जब हर साल दो करोड़ नौकरियों का वादा पूरा न हो सका।
सरकारी भर्तियां रुकीं, ठेके बढ़े, निजी क्षेत्र अस्थिर। कैपेक्स को रोजगार का आधार बताना गलत है क्योंकि खर्च और परिणामों में गहरी खाई है। 2.8 करोड़ शिक्षित युवा बेरोजगार हैं। मनरेगा बदलावों के खिलाफ आंदोलन हो रहे हैं, बजट में अनदेखा। योजना का नाम बदलकर गांधीजी का नाम हटाया, राम को भी जगह न दी। यह सरकार न गांधी की विरासत मानती है न राम के आदर्श अपनाती है।