
देश की राजधानी दिल्ली सहित कई शहर जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। इसी बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने इसे पूरी तरह कागजी साबित करार दिया, जो केवल फाइलों में सिमट गया है।
रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि 2019 में शुरू हुए एनसीएपी के तहत 131 प्रदूषित शहरों में 40 प्रतिशत तक प्रदूषण कम करने का लक्ष्य था। लेकिन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े बयानबाजी करते हैं। दिल्ली, कानपुर, लखनऊ जैसे शहरों में पीएम2.5 का स्तर डब्ल्यूएचओ मानकों से कई गुना अधिक है।
उन्होंने कार्यक्रम की कमियों को उजागर किया। बजट का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हुआ, निगरानी स्टेशन अपर्याप्त हैं और उद्योगों पर कार्रवाई नगण्य। ‘सरकार कॉरपोरेट हितों की दुर्ग में छिपी है, जन स्वास्थ्य की अनदेखी कर रही है,’ रमेश ने आरोप लगाया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वायु प्रदूषण से प्रतिवर्ष लाखों मौतें हो रही हैं। सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में। आर्थिक नुकसान अरबों में आंका जा रहा है।
कांग्रेस ने वचन दिया है कि सत्ता में आने पर एनसीएपी को नया स्वरूप देंगे। इसमें सख्त लक्ष्य, हरित तकनीक में निवेश और राज्य-केंद्र समन्वय शामिल होगा।
दिवाली नजदीक आते ही पटाखों और पराली जलाने का खतरा मंडरा रहा है। रमेश ने तत्काल प्रतिबंध और किसानों के लिए वैकल्पिक उपायों की मांग की। सरकार की प्रतिक्रिया? केवल रिपोर्ट और टास्क फोर्स।
वायु प्रदूषण से जंग जीतने के लिए ठोस इच्छाशक्ति जरूरी है। कांग्रेस का यह हमला विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है, जो पर्यावरण मुद्दों पर सरकार को घेरने को तैयार है। भारत को साफ हवा का अधिकार दिलाने की लड़ाई जारी रहेगी।
