
नई दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बुधवार को लोकसभा में भारत-अमेरिका व्यापारिक समझौते पर तत्काल बहस की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने लोकसभा महासचिव स्नेहलता श्रीवास्तव को पत्र लिखकर सदन के नियमित कार्यों को रोककर इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति मांगी।
तिवारी का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का कथित बयान, जिसमें दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री ने रूसी तेल बंद करने, अमेरिका और वेनेजुएला से आयात बढ़ाने, सभी टैरिफ समाप्त करने तथा 500 अरब डॉलर से अधिक अमेरिकी वस्तुओं की खरीद पर सहमति दी है, अत्यंत चिंताजनक है। यह एक ऐसा सार्वजनिक मुद्दा है जिसकी संसद में फौरी चर्चा जरूरी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि रूसी कच्चा तेल ईंधन महंगाई को नियंत्रित करने में सहायक रहा है। अचानक बदलाव से आम नागरिकों और उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। बड़े पैमाने का यह समझौता घरेलू उद्योगों, किसानों तथा लघु-मध्यम उद्यमियों को गहरा नुकसान पहुंचा सकता है।
तिवारी ने केंद्र सरकार से तत्काल स्पष्टीकरण जारी करने और पूर्ण बहस की मंजूरी देने की अपील की। उन्होंने कहा कि व्यापार, ऊर्जा एवं विदेश नीति जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पारदर्शिता के अभाव में कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।
इस बीच, समझौते के तहत भारतीय निर्यात पर अमेरिकी शुल्क 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर कुछ बाधाएं कम करने को कहा है। विपक्षी दल इसे भारत के हितों के विरुद्ध बता रहे हैं। संसदीय सत्र के दौरान यह विवाद और तेज होने के आसार हैं।