
कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद मणिकम टैगोर ने केंद्र सरकार के जातिगत जनगणना कराने के ऐतिहासिक फैसले का खुलकर स्वागत किया है। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इससे वंचित वर्गों को सशक्त बनाने में बड़ी मदद मिलेगी।
टैगोर का यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। लंबे समय से कांग्रेस समेत विपक्षी दल जाति आधारित जनगणना की मांग करते आ रहे थे। अब केंद्र के इस निर्णय से उन सभी की आवाज सुनी गई प्रतीत हो रही है।
जातिगत जनगणना से ओबीसी, एससी-एसटी समुदायों की सटीक संख्या सामने आएगी, जिसका उपयोग आरक्षण, कल्याण योजनाओं और संसाधन वितरण में किया जा सकेगा। टैगोर ने कहा, ‘यह आंकड़े बिना भेदभाव के विकास सुनिश्चित करेंगे।’
इतिहास में 1931 की जनगणना अंतिम बार थी जब पूर्ण जातिगत आंकड़े संकलित किए गए थे। 2011 की सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना आंशिक रही और उसके आंकड़े उपयोग में नहीं आए। अब नई जनगणना में व्यापक दायरा होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला चुनावी रणनीतियों को प्रभावित करेगा। पिछड़े वर्गों के वोट बैंक पर असर पड़ेगा। टैगोर ने सरकार से शीघ्र कार्यान्वयन की अपील की है।
समाज के विभिन्न तबकों में उत्साह है, हालांकि गोपनीयता और डेटा दुरुपयोग की आशंकाएं भी हैं। टैगोर का स्वागत संकेत देता है कि यह मुद्दा अब सर्वदलीय सहमति का बन सकता है।
कुल मिलाकर, जातिगत जनगणना भारत के सामाजिक परिदृश्य को नया आकार देगी, जिससे समावेशी विकास की राह प्रशस्त होगी।