
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव ने देश की राजनीतिक स्थिरता पर भरोसा जताते हुए कहा है कि भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थिति कतई नहीं है। उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती पर जोर देते हुए पड़ोसी देशों में हालिया अस्थिरता से स्पष्ट अंतर बताया।
मीडियाकर्मियों से बातचीत में सिंहदेव ने कहा, ‘हमारा लोकतंत्र गहरी जड़ों वाला है। हमारे चुनाव निष्पक्ष होते हैं और सत्ता हस्तांतरण शांतिपूर्ण ढंग से होता है।’ उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति का हवाला देते हुए कहा कि जीडीपी वृद्धि, विदेशी मुद्रा भंडार और निवेशक विश्वास चरम पर हैं।
सिंहदेव ने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के शासन मॉडल की सराहना की। ‘हमने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से किए। वन अधिकार कानून का बेहतरीन क्रियान्वयन किया,’ उन्होंने गर्व से कहा। केंद्र-राज्य संबंधों में सहयोगात्मक संघवाद की वकालत करते हुए उन्होंने आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे में सफल साझेदारी के उदाहरण दिए।
कांग्रेस नेता ने विपक्ष की चिंताओं को स्वीकार करते हुए कहा, ‘हम लोकतंत्र के लिए लड़ते हैं, लेकिन परिणामों को स्वीकार भी करते हैं। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है।’ उन्होंने भारत के स्वतंत्र न्यायपालिका, सक्रिय मीडिया और सतर्क नागरिक समाज को लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ बताया।
आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस विकास और समावेशी शासन के एजेंडे पर जनता के बीच जाएगी। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
टीएस सिंहदेव का यह बयान राजनीतिक बहस में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है। यह न केवल सत्ताधारी दल को चुनौती देता है बल्कि विपक्ष को भी संस्थागत स्थिरता के पहरेदार के रूप में स्थापित करता है। भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में ऐसी परिपक्व आवाजें बहुमूल्य हैं।