
मुंबई में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है जब कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने विनोद तावड़े और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच की खटास को उजागर करते हुए कहा कि दिल्ली के आदेशों ने उनकी नापसंदगी को दरकिनार कर दिया। फडणवीस तो जनरल सेक्रेटरी की तरह काम करते हैं।
रामदास आठवले को टिकट देने की बात थी, लेकिन अंत में तावड़े को चुना गया। दलवई ने कहा कि यह भाजपा का आंतरिक मामला है, वे जो चाहें करें। महाविकास अघाड़ी में सीट बंटवारे पर उन्होंने भरोसा जताया। कांग्रेस को राज्यसभा सीट मिले, विधान परिषद शिवसेना (यूबीपी) लड़े। एक सीट पर गठबंधन टूटने की नौबत नहीं आएगी। शरद पवार चुप हैं।
ईरान-इजरायल संघर्ष में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी पर सरकार की पीठ थपथपाहट को दलवई ने खारिज किया। वीपी सिंह ने कुवैत संकट में ऐसा ही किया था। यह ड्यूटी है, तारीफ की चीज नहीं। हमारे मजदूर विदेश कमाते हैं, रेमिटेंस भेजते हैं।
वानखेड़े स्टेडियम में भारत-इंग्लैंड वर्ल्ड कप सेमीफाइनल और अहमदाबाद में फाइनल पर दलवई ने गुजरात पर निशाना साधा। मुंबई क्रिकेट का गढ़ है, गुजराती व्यापार जानते हैं। फाइनल वानखेड़े में हो। पिछली बार अहमदाबाद में पीएम के साथ हारे थे। भारत जरूर जीतेगा। मराठी मानुष सोचें।