
ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले मनरेगा को बचाने के लिए कांग्रेस ने पूरे देश में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू कर दिया है। यह अभियान वर्तमान केंद्र सरकार पर योजना को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए चलाया जा रहा है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में विभिन्न राज्यों में रैलियां, धरने और जागरूकता अभियान तेज हो गए हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर तमिलनाडु तक लाखों मजदूर सड़कों पर उतर आए हैं। कांग्रेस का कहना है कि बजट में कटौती और भुगतान में देरी से ग्रामीण बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है।
मनरेगा, जो 2005 में यूपीए सरकार ने शुरू किया था, ने करोड़ों परिवारों को रोजगार दिया। लेकिन हाल के वर्षों में कार्य मांग पूरी करने का प्रतिशत घटकर 60 से नीचे आ गया। अभियान में समयबद्ध भुगतान, मजदूरी वृद्धि और 150 दिन का काम की मांग प्रमुख है।
राजस्थान में एक मजदूर ने बताया, ‘छह माह से वेतन नहीं मिला, परिवार भूखा है।’ इसी तरह मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों में जल संरक्षण कार्य रुके पड़े हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वीडियो संदेश में कहा, ‘यह गरीबों का हक है, इसे कोई छीन नहीं सकता।’
चुनावी साल में यह संग्राम विपक्ष की रणनीति का हिस्सा लगता है, लेकिन ग्रामीण असंतोष को आवाज दे रहा है। भाजपा इसे राजनीतिक स्टंट बता रही है, मगर आंकड़े कांग्रेस के पक्ष में हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज होगा।