
नई दिल्ली में संसदीय सत्र के दौरान बढ़ते विवादों के बीच कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ संभावित अविश्वास प्रस्ताव पर अपना रुख साफ कर दिया है। पार्टी ने जोर देकर कहा कि ऐसा कोई कदम उठाने से पहले संवैधानिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होगा और औपचारिक घोषणा के बिना कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, ‘अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया संविधान में स्पष्ट है। जैसे ही यह विधिवत पेश होगा, हम इसे सार्वजनिक करेंगे। तब तक अटकलों पर चुप्पी साधे रहेंगे।’
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस शीघ्र ही लोकसभा महासचिव को नोटिस सौंप सकती है। यह घटना उस समय घटी जब सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव चरम पर है। हंगामा, बहस और कार्यवाही रुकना आम हो गया है।
इंडिया गठबंधन के दल अध्यक्ष के पक्षपातपूर्ण रवैये पर सवाल उठा रहे हैं। राष्ट्रपति अभिभाषण पर बहस में राहुल गांधी को बोलने न देने को संसदीय मर्यादा का उल्लंघन बताया जा रहा है।
सांसद सुखदेव भगत ने कहा, ‘यह किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, न्याय और संविधान की रक्षा का सवाल है। राहुल के बयानों से डर साफ है। स्पीकर का पद स्वतंत्र होना चाहिए।’
विपक्ष के अन्य आरोपों में आठ सांसदों का निलंबन, निशिकांत दुबे पर कार्रवाई न होना और महिला सांसदों पर बेबुनियाद इल्जाम शामिल हैं। यह प्रस्ताव संसद की दिशा बदल सकता है।