
वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में बड़ा उलटफेर हो रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार भारत और चीन में कोयले से बिजली उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि हरी ऊर्जा का उपयोग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। ये दोनों देश, जो कभी कोयले पर बुरी तरह निर्भर थे, अब सौर और पवन ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में कोयला आधारित बिजली का हिस्सा पिछले साल 10 प्रतिशत से अधिक कम हुआ, वहीं चीन में भी इसी तरह की गिरावट आई। सौर पैनलों की कीमतों में भारी कमी और पवन टरबाइनों की क्षमता बढ़ने से यह बदलाव संभव हुआ। भारत सरकार का 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य और चीन का कार्बन न्यूट्रल बनने का वादा इसकी बुनियाद हैं।
इस बदलाव से शहरों में प्रदूषण कम हो रहा है, बिजली सस्ती पड़ रही है और लाखों नई नौकरियां पैदा हो रही हैं। हालांकि, बैटरी स्टोरेज और ग्रिड अपग्रेड जैसी चुनौतियां बाकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक दोनों देशों में आधी से ज्यादा बिजली हरी स्रोतों से बनेगी।
यह रिपोर्ट विकासशील देशों के लिए मिसाल पेश करती है कि स्वच्छ ऊर्जा न केवल संभव है, बल्कि आर्थिक रूप से फायदेमंद भी। कोयले का दौर धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है।