
ओडिशा की प्रसिद्ध चिल्का झील में इरावदी डॉल्फिन की जनगणना का कार्य आज सतपड़ा क्षेत्र से प्रारंभ हो गया। कुल 18 टीमें तीन दिनों तक नावों पर सवार होकर विभिन्न सेक्टरों में गहन सर्वे करेंगी। यह झील एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी वाली लगून है, जिसे 1981 में रामसर संधि के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि घोषित किया गया था।
पुरी, खुर्दा और गंजाम जिलों में फैली यह झील पर्यावरणीय और पर्यटन दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मानसून में इसका क्षेत्रफल 1165 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाता है, जबकि गर्मियों में सिमटकर 906 वर्ग किलोमीटर रह जाता है। सर्दियों में प्रवासी पक्षी यहां आते हैं, वहीं मछली पकड़ना, डॉल्फिन दर्शन और नेचर वॉक पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
चिल्का इरावदी डॉल्फिन का एकमात्र अंतर्देशीय आवास है। यह छोटी प्रजाति म्यांमार की इरावदी नदी से अपना नाम लेती है। सहायक वन संरक्षक सौम्य रंजन साहू ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद टीमें बोट ट्रांजेक्ट विधि से निर्धारित मार्गों पर तीन बार सर्वे कर रही हैं। प्रत्येक टीम को जीपीएस, दूरबीन, कैमरा आदि उपकरण दिए गए हैं।
पहले दिन का कार्य पूरा हो चुका है। दो दिन और शेष हैं, उसके बाद आंकड़े विश्लेषित होंगे। साहू ने लोगों से प्लास्टिक का त्याग करने और डॉल्फिन के नजदीक न जाने की अपील की। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की साध्वी सिंधुरा ने कहा कि यह सर्वे झील के स्वास्थ्य का सूचक है, जो मछुआरों और पर्यटन पर निर्भर समुदायों से जुड़ा है।