
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के घने जंगलों में बसे कमकापार गांव में जल जीवन मिशन की चमक फीकी पड़ चुकी है। दो साल पहले टंकी बनाई गई, पाइपलाइन बिछाई गई, हर घर में नल लगे, लेकिन एक बूंद पानी भी नहीं बहा। साढ़े तीन हजार की आबादी अब भी प्यासी है।
कमकापार ग्राम पंचायत के अंतर्गत टेकापार और कुरुभाट टोले भी इस संकट से जूझ रहे हैं। एकमात्र सोलर पंप पर सब निर्भर हैं। यह खराब हो जाए तो दो-दो दिन बिना पानी के गुजारने पड़ते हैं। हैंडपंप और बोरवेल सूख चुके हैं।
ग्रामीण मंजू विश्वकर्मा और महार सिंह देशमुख ने आरोप लगाया कि योजना का लाभ नहीं मिला। टंकी खाली पड़ी है, कोई टेस्टिंग नहीं हुई। कागजों में पूरी, जमीन पर अधर में योजना।
जिला कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने जनसमस्या शिविर में शिकायत सुनी। पीएचई विभाग को तत्काल पानी सप्लाई शुरू करने के निर्देश दिए। उम्मीद है कि जल्द राहत मिलेगी।
गर्मी नजदीक आ रही है। कमकापार की यह कहानी योजनाओं की जमीनी सच्चाई बयां करती है। बिना कार्यान्वयन के बुनियादी ढांचा बेकार है।
