
छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती के अवैध कारनामों ने हड़कंप मचा दिया है। दुर्ग और बलरामपुर जिलों में तीन बड़े मामले सामने आए हैं, जहां करोड़ों की फसलें नष्ट की गईं और दर्जन भर लोग गिरफ्तार हुए। भारत में अफीम की खेती सिर्फ मध्य प्रदेश, राजस्थान व उत्तर प्रदेश के चुनिंदा इलाकों में केंद्र सरकार के लाइसेंस पर चिकित्सा प्रयोजनों के लिए वैध है। छत्तीसगढ़ इसमें शुमार नहीं, इसलिए यहां यह पूरी तरह गैरकानूनी है। एनडीपीएस एक्ट के तहत 10 से 20 साल की सजा और लाखों का जुर्माना हो सकता है।
दुर्ग के समोदा गांव में पहला धमाका हुआ। मक्के के खेतों में छिपाकर 4-6 एकड़ अफीम लहलहा रही थी, जिसकी कीमत 7-8 करोड़ आंकी गई। सरप्राइज, खेती करा रहे थे बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार। 6 मार्च की छापेमारी में बाउंसरों ने सुरक्षा दी थी। तीनों गिरफ्तार, पार्टी से निकाला गया, फसल बुलडोजर से उजाड़ दी। कांग्रेस ने विधानसभा में बवाल काटा, पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने नशा माफिया को संरक्षण का आरोप लगाया।
बलरामपुर में कुसमी क्षेत्र के दो मामले। पहले 2-3 एकड़ पर झारखंड निवासी ने फूलों की आड़ में अफीम बोई, फल लगे थे। पांच गिरफ्तार, फसल तबाह। दूसरे में चंदाडांडी के 9 एकड़ पर झारखंड व्यापारियों का हाथ, वे फरार। जांच तेज।
वहीं एमपी के मालवा—मंदसौर, नीमच, रतलाम—में सीबीएन की निगरानी में लाइसेंस पर खेती होती है। ग्वालियर मुख्यालय से मंजूरी, सारी उपज सरकार को। राजस्थान के झालावाड़ आदि क्षेत्र समान।
झारखंड लिंक से बड़े नेटवर्क का पता चला। सख्त कार्रवाई जरूरी।
