
मुंबई की विशेष अदालत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल को महाराष्ट्र सदन घोटाले से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में निर्दोष मुक्त कर दिया है। एसीबी के बाद ईडी को भी झटका लग गया है।
विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण नवंदर ने भुजबल समेत सभी आरोपीयों की डिस्चार्ज याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मूल अपराध साबित न होने पर मनी लॉन्ड्रिंग का कोई आधार नहीं बचता। ईडी की कार्रवाई को खारिज कर दिया गया।
यह मामला 2005 का है जब भुजबल राज्य के उपमुख्यमंत्री और पीडब्ल्यूडी मंत्री थे। उन पर दिल्ली में महाराष्ट्र सदन के निर्माण का ठेका बिना टेंडर के चमनकर एंटरप्राइज को देने का आरोप लगा। जांच में करीब 13.5 करोड़ की रिश्वत का दावा किया गया।
11 जून 2015 को पीएमएलए के तहत दो मामले दर्ज हुए। भुजबल के बेटे समीर, भतीजे पंकज सहित 52 अन्य आरोपी थे। 2016 में 10 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तारी हुई और दो साल जेल काटनी पड़ी।
कानूनी जानकारों का कहना है कि पीएमएलए मूल अपराध पर टिका होता है। एसीबी केस खत्म होने से ईडी का केस भी गिर गया। यह फैसला महाराष्ट्र राजनीति में भुजबल की वापसी का संकेत देता है।
एनसीपी नेता इसे न्यायिक जीत बता रहे हैं। आने वाले चुनावों में यह उनके पक्ष में भारी पड़ेगा। अदालत ने जांच एजेंसियों को कड़ा संदेश दिया है कि बिना ठोस आधार के कार्रवाई नहीं चलेगी।