
चेन्नई में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। शहर प्रशासन ने 100 अत्याधुनिक डिजिटल सेंसर बोर्ड लगाने का ऐलान किया है, जो वायु गुणवत्ता की रीयल-टाइम निगरानी करेंगे। यह पहल तमिलनाडु की राजधानी में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
ये सेंसर पीएम2.5, पीएम10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और ओजोन जैसे प्रमुख प्रदूषकों की निगरानी करेंगे। एकत्रित डेटा एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगा, जिससे नागरिकों और अधिकारियों को तत्काल जानकारी मिल सकेगी। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘यह नेटवर्क चेन्नई में प्रदूषण समझने और रोकने का तरीका बदल देगा।’
सेंसरों को औद्योगिक क्षेत्रों, ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स, आवासीय इलाकों और तटीय भागों में लगाया जाएगा। अंबत्तूर, मणाली और गुइंदी जैसे संवेदनशील इलाकों को प्राथमिकता मिलेगी। राज्य और केंद्र सरकार के फंड से वित्त पोषित यह प्रोजेक्ट अगले छह महीनों में पूरा हो जाएगा।
पिछले वर्षों में चेन्नई की वायु गुणवत्ता बिगड़ी है। वाहनों के धुएं, निर्माण धूल और फैक्ट्रियों से प्रदूषण चरम पर पहुंचा। सर्दियों में कई दिन ‘खराब’ वायु गुणवत्ता दर्ज की गई, जिससे स्वास्थ्य चेतावनियां जारी हुईं। यह सिस्टम न केवल निगरानी करेगा बल्कि खतरे की पूर्व चेतावनी भी देगा।
विशेषज्ञों ने इसे सराहा। आईआईटी मद्रास की पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. प्रिया शर्मा ने कहा, ‘रीयल-टाइम डेटा से ट्रैफिक प्रबंधन से लेकर उत्सर्जन नियंत्रण तक सटीक कदम उठाए जा सकेंगे।’ यह राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के लक्ष्यों से मेल खाता है, जो 2026 तक 40 प्रतिशत प्रदूषण कम करने का है।
नागरिकों को मोबाइल ऐप से लाइव अपडेट मिलेंगे, जिससे जागरूकता बढ़ेगी। स्कूलों और अस्पतालों को स्थानीय अलर्ट से कमजोर वर्ग सुरक्षित रहेंगे। चेन्नई का यह प्रयास शहर को स्वच्छ और रहने लायक बनाने की दिशा में मजबूत कदम है।