
होली का रंगीन त्योहार खुशियों की सौगात लाता है, लेकिन बाजार के केमिकल रंग त्वचा के लिए जहर साबित हो रहे हैं। इनमें लेड, मरकरी, क्रोमियम जैसी भारी धातुएं, इंडस्ट्रियल डाई और कभी-कभी इंजन ऑयल तक घुला होता है। हर साल लाखों टन ऐसे रंगों का इस्तेमाल होता है, जो त्वचा को झुलसा देते हैं।
त्वचा में जलन, खुजली, लाल चकत्ते, सूजन और एक्जिमा जैसी परेशानियां पैदा हो जाती हैं। चेहरा सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। एक्ने, सोरायसिस या संवेदनशील त्वचा वालों की हालत बिगड़ जाती है। बच्चों के लिए लेड घातक है, गर्भवती महिलाओं को भी खतरा। आंखों में जलन, बाल झड़ना, नाखून कमजोर होना आम है।
होली से पहले नारियल या सरसों का तेल लगाएं, जो रंगों का बैरियर बनाता है। मॉइस्चराइजर, सनस्क्रीन, लिप बाम और नेल पॉलिश जरूरी। सनग्लास पहनें। बाद में ठंडे पानी और हल्के क्लेंजर से साफ करें, रगड़ें नहीं। जलन हो तो डॉक्टर से मिलें।
हर्बल रंग सबसे बेहतर विकल्प हैं। पालक-धनिया से हरा, हल्दी-गेंदे से पीला, चुकंदर-पलाश से लाल, नीले फूलों से नीला, गुलाब से गुलाबी रंग बनाएं। ये त्वचा के दोस्त हैं, आसानी से धुलते हैं और पर्यावरण सुरक्षित रखते हैं। सुरक्षित होली मनाएं।