
पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में बसा चांदीपुर एक ऐसा इलाका है जो राजनीतिक रोमांच की पूरी कहानी बयां करता है। तमलुक उपखंड का यह ग्रामीण ब्लॉक टीएमसी का अभेद्य गढ़ माना जाता रहा है, खासकर तब जब यहां से सुपरस्टार विधायक सोहम चक्रवर्ती मैदान संभालते हैं।
गंगा के निचले मैदानों और बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित चांदीपुर की भौगोलिक स्थिति इसे बाढ़ का शिकार बनाती है। हल्दी, रूपनारायण, रसूलपुर, केलेघाई और बागुई जैसी नदियां यहां की जीवनरेखा हैं। ये नदियां खेतों को सींचती हैं, उपजाऊ मिट्टी लाती हैं और धान, आलू, तिलहन, दालें, सब्जियां व पान की पत्तियों की खेती को समृद्ध बनाती हैं। मछली पालन भी प्रमुख आजीविका है। लेकिन हर साल मानसूनी बाढ़ तबाही मचाती है।
अर्थव्यवस्था कृषि-केंद्रित है। गांवों में बिजली-पानी पहुंचा, लेकिन पक्की सड़कें, परिवहन व बैंकिंग सुविधाएं अब भी अपर्याप्त हैं। तमलुक मुख्यालय 25-27 किमी दूर है, जो निकटतम रेल स्टेशन भी है। हावड़ा-खड़गपुर लाइन से कोलकाता जुड़ता है। भगवानपुर, हल्दिया, एगरा व कांथी आसपास हैं, पर ग्रामीण यात्रा कठिनाई भरी।
2011 में बनी चांदीपुर विधानसभा सीट (कांथी लोकसभा का हिस्सा) टीएमसी ने हासिल की। अमिय कांति भट्टाचार्य ने सीपीएम को बुरी तरह हराया। 2016 में भी जीत। 2021 में भाजपा उभरी तो टीएमसी ने सोहम को उतारा, जिन्होंने 13,472 वोटों से जीत हासिल की।
लोकसभा चुनावों में ट्विस्ट: 2014 में टीएमसी की भारी बढ़त घटकर 2024 में भाजपा के 842 वोटों की बढ़त बन गई। मतदाता जागरूक, वोटिंग 86-91%। 2026 में क्या होगा? देखना बाकी।