
उत्तर भारत की चैत्र नवरात्रि की धूम के बीच दक्षिण के केरल में एक ऐसा मंदिर है जो अपनी अनूठी परंपरा से सबका ध्यान खींचता है। एर्नाकुलम जिले के कोच्चि के नजदीक स्थित चोट्टानिक्करा भगवती मंदिर करीब सवा सदी पुराना है और यहां मां दुर्गा के तीन अलग-अलग रूपों की पूजा हर प्रहर में होती है।
सुबह होते ही मां सरस्वती के स्वरूप में श्वेत वस्त्रों से सुसज्जित होकर ज्ञान की वर्षा करती हैं। दोपहर में लाल साड़ी पहनकर मां लक्ष्मी के रूप में धन-समृद्धि बरसाती हैं। शाम ढलते ही नीले परिधान में भद्रकाली रूप धारण कर बुराइयों का नाश करती हैं। ये तीनों पूजाएं अलग-अलग विधियों से संपन्न होती हैं, जो भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
मां चोट्टानिक्करा को चर्म रोग नाशिनी माना जाता है। मानसिक पीड़ाओं, तंत्र-मंत्र और भूत-प्रेत बाधाओं से मुक्ति के लिए भी यहीं आते हैं भक्त। गुरुथी पूजा में 12 कलशों में मिठा पानी अर्पित कर विशेष अनुष्ठान होता है। चैत्र मास में मकरम थोजल उत्सव मार्च में आयोजित होता है, जब मकरम नक्षत्र में विशेष दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।
मंदिर की वास्तुकला लकड़ी-पत्थर से बनी है, जिसमें बौद्ध प्रभाव वाली नुकीली शिखर वाली संरचना है। प्रांगण में चमत्कारी वृक्ष है, जहां मनौती का धागा बांध भक्त इच्छापूर्ति की कामना करते हैं। इस नवरात्रि चोट्टानिक्करा की यात्रा कर मां की कृपा पाएं।