
महिलाओं के लिए सर्वाइकल कैंसर एक ऐसा खतरा है जो चुपचाप बढ़ता है और खासकर 30 से 45 साल की उम्र में जोर पकड़ लेता है। प्रमुख कैंसर विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक अपनी गहन जानकारी के आधार पर बता रही हैं कि इस उम्र में जोखिम क्यों चरम पर होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
एचपीवी वायरस इस बीमारी का मुख्य कारण है, जो यौन संबंधों से फैलता है। युवा अवस्था में यह वायरस ज्यादातर शरीर से खुद चला जाता है, लेकिन 35 साल के बाद अगर यह बने रहता है तो कोशिकाओं में बदलाव शुरू हो जाते हैं। डॉ. पाठक कहती हैं, ‘इस उम्र में प्री-कैंसरस बदलाव तेजी से कैंसर में बदल सकते हैं।’
कई कारण इस खतरे को बढ़ाते हैं—धूम्रपान, बार-बार गर्भधारण, कमजोर इम्यूनिटी। भारत में जहां स्क्रीनिंग की कमी है, वहां 35-44 साल की महिलाओं में मामले सबसे ज्यादा दर्ज होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े भी यही पुष्टि करते हैं।
रोकथाम के उपाय सरल हैं। 9-26 साल की उम्र में एचपीवी वैक्सीन लेना सबसे प्रभावी है। 21 साल से पाप स्मीयर टेस्ट शुरू करें। डॉ. पाठक बताती हैं, ‘समय पर जांच से कई मरीजों को कैंसर होने से बचा लिया।’
लक्षण जैसे असामान्य रक्तस्राव या दर्द नजरअंदाज न करें। जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। इस संवेदनशील उम्र में सतर्क रहें, जीवन बचाएं।