
नई दिल्ली। उद्योगपति अनिल अंबानी के घर और रिलायंस कम्युनिकेशंस के कार्यालयों पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने धावा बोल दिया है। यह छापेमारी बैंक ऑफ बड़ौदा की 24 फरवरी की शिकायत पर दर्ज दूसरे मामले के बाद हुई, जिसमें 2220 करोड़ रुपये के कर्ज में धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है।
सीबीआई ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत एफआईआर दर्ज की है। इसमें अनिल अंबानी, कंपनी और अन्य पर पद के दुरुपयोग का इल्जाम है। बैंक को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए कर्ज को फर्जी लेन-देन से संबंधित पक्षों को ट्रांसफर किया गया। खातों में हेरफेर कर गड़बड़ियां छिपाई गईं।
छापों में लोन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त हुए। यह खाता 2017 में ही एनपीए घोषित हो चुका था, लेकिन अंबानी की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने फ्रॉड टैग पर रोक लगाई थी। 23 फरवरी को रोक हटने के बाद बैंक ने शिकायत की और सीबीआई ने तुरंत ऐक्शन लिया।
यह मामला एसबीआई के नेतृत्व वाले 11 बैंकों के कंसोर्टियम से अलग है। बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक से लिया यह कर्ज अब विलय के बाद बोब का है। जांच जारी है, जो रिलायंस के वित्तीय संकट को नई करवट दे सकती है।
बैंकों के एनपीए संकट के बीच यह घटना कॉर्पोरेट जवाबदेही पर सवाल उठाती है। अनिल अंबानी का साम्राज्य अब कानूनी चुनौतियों से जूझ रहा है। आगे की जांच से बड़े खुलासे हो सकते हैं।