
नई दिल्ली में एक बड़ी सफलता हासिल हुई है, जहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इंटरपोल के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (एनसीबी) के रूप में काम करते हुए मलेशिया के एनसीबी-कुआलालंपुर के साथ मिलकर तीन वांछित अपराधियों को भारत से डिपोर्ट कर दिया। ये तीनों—श्रीधरन सुब्रमण्यम, प्रतीफकुमार सेल्वराज और नवींद्रन राज कुमारसन—मंगलवार को मुंबई हवाई अड्डे पर पकड़े गए और सीधे मलेशिया वापस भेज दिए गए।
ये व्यक्ति संगठित अपराधों से जुड़े गंभीर मामलों में मलेशियाई अधिकारियों के रडार पर थे। इन पर अवैध आर्थिक लाभ और प्रभाव बढ़ाने के इरादे से अपराध करने के आरोप हैं। ब्रिटेन से भारत आने पर मुंबई इमिग्रेशन अधिकारियों ने रेड नोटिस देखते ही प्रवेश रोक दिया। मलेशिया ने तत्काल एनसीबी-नई दिल्ली से अनुरोध किया।
25 जनवरी को रॉयल मलेशिया पुलिस की टीम मुंबई पहुंची। सीबीआई और अन्य भारतीय एजेंसियों के समन्वय से पूरी प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के संपन्न हुई। यह घटना भारत-मलेशिया के बीच कानूनी सहयोग की मिसाल है।
इंटरपोल का रेड नोटिस सिस्टम वैश्विक अपराधियों को पकड़ने का शक्तिशाली हथियार साबित हो रहा है। यह न केवल भगोड़ों की तलाश आसान बनाता है, बल्कि प्रत्यर्पण को भी तेज करता है। इस सफलता से अंतरराष्ट्रीय अपराध के खिलाफ लड़ाई में नई ऊर्जा मिली है। आने वाले समय में ऐसी कार्रवाइयां और मजबूत होंगी।