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कैग रिपोर्ट: जम्मू-कश्मीर की 697 में से 518 झीलें गायब

जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता का एक बड़ा हिस्सा खतरे में है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताजा रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि क्षेत्र की 697 दर्ज झीलों में से 518 पूरी तरह गायब हो चुकी...

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Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
|भारत|
April 6, 2026
कैग रिपोर्ट: जम्मू-कश्मीर की 697 में से 518 झीलें गायब
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जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता का एक बड़ा हिस्सा खतरे में है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताजा रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि क्षेत्र की 697 दर्ज झीलों में से 518 पूरी तरह गायब हो चुकी हैं। यह आंकड़ा पर्यावरणीय तबाही की भयावह तस्वीर पेश करता है, जहां कभी पानी से लबालब ये तालाब अब सूखे मैदानों में तब्दील हो गए हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि शहरीकरण, अनियंत्रित पर्यटन और जल प्रबंधन की कमी ने इन झीलों को निगल लिया। श्रीनगर की प्रसिद्ध डल झील इसका जीता-जागता उदाहरण है, जो कम होते जल स्तर और बढ़ते नालियों से जूझ रही है। कश्मीर घाटी और लद्दाख की छोटी-बड़ी झीलें भी इसी तरह प्रभावित हुई हैं।

जलवायु परिवर्तन, भूजल का अंधाधुंध दोहन और अवैध निर्माण मुख्य कारण हैं। राज्य सरकारों द्वारा संरक्षण योजनाओं पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये व्यर्थ गए, क्योंकि अमल में लापरवाही बरती गई। ये झीलें बाढ़ नियंत्रण, जैव विविधता और आजीविका का आधार थीं।

उनका लोप पक्षी प्रवास, मछलियों और जल सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है। रिपोर्ट केंद्र और केंद्रशासित प्रदेश सरकार को सख्त कदम उठाने की चेतावनी देती है। झीलों की बहाली के लिए कड़े कानून, सामुदायिक सफाई और टिकाऊ पर्यटन जरूरी है। जम्मू-कश्मीर को अपनी जल संपदा को बचाने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी होगी।

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