
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भगोड़े व्यवसायी विजय माल्या को सख्त चेतावनी दी है। मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर की अगुवाई वाली बेंच ने गुरुवार को कहा कि अदालती कार्रवाई से जानबूझकर बचने वाला व्यक्ति न्यायोचित राहत का हकदार नहीं। फिर भी निष्पक्षता के चलते माल्या को अंतिम अवसर दिया गया है कि वे भारत वापसी का इरादा जाहिर करें या नहीं।
कोर्ट माल्या की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018 की वैधता और उनकी भगोड़ा घोषणा को चुनौती दी गई। सुनवाई में कोर्ट ने कहा, ‘आपको लौटना ही होगा। न लौटे तो याचिका पर सुनवाई संभव नहीं। आप प्रक्रिया से बच रहे हैं, राहत की उम्मीद न करें। लेकिन हम मामला खारिज नहीं कर रहे, एक और मौका मिल रहा है।’
अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई। विदेश मंत्रालय ने भी आर्थिक अपराधियों को वापस लाने का संकल्प दोहराया। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि माल्या व ललित मोदी जैसे मामलों में कानूनी प्रयास जारी हैं।
लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि 31 अक्टूबर 2025 तक 15 भगोड़ों को चिह्नित किया गया। इनमें 9 पर बैंकों से 26,645 करोड़ का मूल धोखा, कुल 31,437 करोड़ बकाया, 19,187 करोड़ वसूल। माल्या ने आरोप नकारे और वसूली आंकड़ों पर जांच की मांग की।
यह फैसला आर्थिक भगोड़ों के खिलाफ भारत की मजबूत रणनीति को दर्शाता है। माल्या का अगला कदम तय करेगा कि वे न्याय के कठघरे में लौटेंगे या नहीं।