
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनावों में सियासी घमासान छिड़ गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य व तेजश्री ठाकरे के बीच सीधा मुकाबला है। 1985 से बीएमसी पर काबिज शिवसेना (यूबीटी) का 39 साल पुराना राज अब डगमगा रहा है।
एशिया की सबसे अमीर नागरिक संस्था बीएमसी का बजट कई राज्यों से ज्यादा है। बालासाहेब ठाकरे के जमाने से शिवसेना ने इसे अपनी जागीर बना रखा था। 2022 के विधानसभा संकट के बाद शिंदे गुट के बीजेपी से हाथ मिलाने से समीकरण बदल गए।
फडणवीस ने महायुति के बैनर तले प्रचार तेज कर दिया है। ‘मुंबई को विश्वस्तरीय सेवाएं चाहिए, वंशवाद नहीं,’ उन्होंने रैली में कहा। आदित्य ठाकरे युवा सेना के जरिए आक्रामक हैं, जबकि तेजश्री महिलाओं व स्लमवासियों को जोड़ रही हैं।
महिम, वरली, बांद्रा जैसे प्रमुख वॉर्ड्स में जंग तेज। सड़कों पर गड्ढे, पानी की किल्लत, झुग्गी पुनर्वास प्रमुख मुद्दे। 227 सीटों पर 10 हजार से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में।
एक्जिट पोल्स टक्कर की बताते हैं। फडणवीस की जीत से बीजेपी का शहरी वर्चस्व बढ़ेगा, तो ठाकरे भाइयों की कामयाबी विपक्ष को मजबूत करेगी। यह चुनाव महाराष्ट्र की सियासत का भविष्य तय करेगा।