
चेन्नई। तमिलनाडु भाजपा ने राज्य सरकार के 2026-27 अंतरिम बजट पर तीखा प्रहार किया है। पार्टी ने इसे ‘मृगतृष्णा’ बताते हुए आरोप लगाया कि यह बजट जनकल्याण की अनदेखी करते हुए राज्य को भारी कर्ज के जाल में फंसा रहा है।
भाजपा प्रवक्ता एएनएस प्रसाद ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधा। वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु द्वारा पेश बजट में वित्त, अर्थव्यवस्था, उद्योग और जनहित के क्षेत्रों में कोई ठोस योजना नजर नहीं आ रही, उन्होंने कहा।
प्रसाद ने तंज कसा कि सरकार दोहरे अंकों वाली आर्थिक वृद्धि का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन इसका फायदा आम जनता को नहीं मिला। विकास का लाभ नेताओं, पार्टी पदाधिकारियों और विधायकों तक सीमित रहा, जबकि समाज का अधिकांश हिस्सा परेशानियों से जूझ रहा है।
पिछले पांच सालों में शिक्षकों, चिकित्सकों, इंजीनियरों, किसानों, दिव्यांगों, नर्सों, सड़क कर्मियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगों पर सरकार का कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
उन्होंने नॉर्थ चेन्नई प्रोजेक्ट पर जानकारी की कमी, कूवा नदी सफाई के लिए बजट स्पष्टता के अभाव और जल निकायों से अतिक्रमण हटाने में देरी पर सवाल उठाए। अदालतों के निर्देशों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
राज्य के बढ़ते कर्ज पर प्रसाद ने विशेषज्ञ समिति की प्रगति पर सवाल किया। उन्होंने चेतावनी दी कि तमिलनाडु अस्थिर वित्तीय रास्ते पर अग्रसर है और मुख्यमंत्री को सफाई देनी होगी।
भाजपा ने बजट को जनविरोधी बताते हुए डीएमके पर चुनावी वादों से मुकरने का आरोप लगाया। यह विवाद राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ सकता है।