
नई दिल्ली में राजनीतिक तापमान अचानक चढ़ गया जब भाजपा नेताओं ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा भाजपा सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को ‘गद्दार दोस्त’ कहे जाने की कड़ी निंदा की। राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद ने इसे कांग्रेस की सिख समुदाय के प्रति गहरी नफरत का प्रमाण बताया।
निषाद ने कहा कि राहुल का यह बयान निंदनीय है और सभ्य समाज में ऐसी भाषा की कोई जगह नहीं। उन्होंने ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस लंबे समय से सिखों के खिलाफ पूर्वाग्रह रखती आई है। यह टिप्पणी न केवल एक व्यक्ति का अपमान है, बल्कि पूरे समुदाय को ठेस पहुंचाती है।
भाजपा नेता डॉ. के. लक्ष्मण ने भी बयान को सिख विरोधी दंगों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा समुदायों का राजनीतिक फायदा उठाया है, लेकिन अब जागरूक जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। लोकतंत्र में ऐसी बयानबाजी अस्वीकार्य है।
संसद सत्र बाधित करने पर बृजलाल ने कांग्रेस को साजिशकर्ता ठहराया। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष की रणनीति की आलोचना की, जिसमें महिला सांसदों को आगे किया गया। राज्यसभा में सुचारु चर्चा के विपरीत, लोकसभा को ठप करने को उन्होंने देशद्रोही कृत्य बताया और माफी की मांग की।
बृजलाल ने ‘घूसखोर पंडत’ फिल्म के नाम पर भी आपत्ति जताई, कहा कि यह जातिवाद फैलाएगा। केंद्र मंत्री बीएल वर्मा ने इसे सिख समुदाय का अपमान करार दिया। राहुल के बयानों की आदत को उजागर करते हुए उन्होंने कांग्रेस की मानसिकता पर सवाल उठाए।
यह विवाद राजनीतिक दलों के बीच तनाव को और गहराा रहा है, जहां सांप्रदायिक सद्भाव और संसदीय गरिमा दांव पर लगी है। भाजपा ने कांग्रेस को घेरने का पूरा प्रयास किया, जबकि विपक्ष ने चुप्पी साधी। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाता नजर आ रहा है।
