
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद ने तूल पकड़ लिया है। दार्जिलिंग के गोसाईहाट में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मुख्य अतिथि बनने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान ने हंगामा मचा दिया। भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने इसे राष्ट्रपति का घोर अपमान बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।
गुप्ता ने कहा कि टीएमसी की यह राजनीति देश को शर्मसार कर रही है। ‘जब शासन में देश के प्रथम नागरिक का ऐसा बर्ताव हो, तो बंगाल की जनता क्या उम्मीद करे? राष्ट्रपति आदिवासी परंपरा के पवित्र उत्सव में आई थीं, लेकिन टीएमसी ने बहिष्कार कर दिया। पूरा देश उनकी पीड़ा से आहत है।’
ममता ने भाजपा पर निशाना साधा कि वे संविधान को तोड़-मरोड़ रहे हैं। ‘महिला को भाजपा के एजेंडे के लिए भेजा गया। मुझे खेद है, लेकिन आप उनके जाल में फंस गई हैं। यह राजकीय कार्यक्रम नहीं था, सूचना भी नहीं मिली। साल में 50 बार आने पर हर बार कैसे उपस्थित रहूं?’
यह घटना राज्य और केंद्र के बीच तनाव को उजागर करती है। आदिवासी समाज का सम्मेलन होने के बावजूद राज्य सरकार की अनदेखी ने सवाल खड़े कर दिए। भाजपा इसे टीएमसी की सांस्कृतिक असंवेदनशीलता बता रही है। आने वाले चुनावों में यह मुद्दा गरमाता नजर आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि संस्थागत सम्मान का यह प्रसंग बंगाल की सियासत को नई दिशा दे सकता है।