
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है। भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने गठबंधन में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए अधिकांश वार्डों पर कब्जा जमा लिया। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की एमएनएस को करारी हार का सामना करना पड़ा।
227 वार्डों में चली जोरदार टक्कर के बाद गिनती पूरी होने पर साफ हो गया कि गठबंधन ने 165 से अधिक सीटें हासिल कर लीं। मतदाताओं ने सड़कों की खराब हालत, पानी की किल्लत और कचरा प्रबंधन जैसी स्थानीय समस्याओं पर विकास के वादों को तरजीह दी। शिंदे शिवसेना ने पारंपरिक क्षेत्रों में उद्धव गुट को पीछे छोड़ दिया।
बीएमसी, जिसका सालाना बजट 52 हजार करोड़ रुपये से अधिक है, अब गठबंधन के हाथों में है। नई कोरपोरेशन मेट्रो विस्तार, तटीय सड़क और झुग्गी पुनर्वास जैसी परियोजनाओं को गति देने का वादा कर रही है। विपक्ष ने अनियमितताओं का आरोप लगाया है, लेकिन जश्न मनाने वाले कार्यकर्ता इसे जनादेश बता रहे हैं।
ठाकरे भाईयों के लिए यह हार राजनीतिक संकट पैदा करने वाली है। उद्धव ने कानूनी लड़ाई का संकेत दिया, वहीं राज ठाकरे चुप्पी साधे हैं। मुंबईवासियों को अब सुशासन की उम्मीद है, जो आने वाले विधानसभा चुनावों का रुख भी तय करेगा।