
झारखंड में विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा ने अपनी संगठनात्मक संरचना को मजबूत करने के लिए 23 जिला अध्यक्षों के नाम घोषित कर दिए हैं। यह फैसला राज्य के जटिल सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया गया है, जिसमें आदिवासी, पिछड़ी और सामान्य जातियों का संतुलन बनाया गया है।
रांची में गुरुवार को हुई इस घोषणा के बाद पार्टी नेताओं ने कहा कि ये नए जिला अध्यक्ष स्थानीय स्तर पर संगठन को नई गति देंगे। गुमला, लोहरदगा जैसे आदिवासी बाहुल्य जिलों में हो और ओरांव समुदाय के नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, यादव-कुर्मी बहुल क्षेत्रों में ओबीसी चेहरों को प्राथमिकता दी गई।
भाजपा के राज्य अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने बताया कि यह चयन प्रक्रिया कई महीनों की मेहनत का नतीजा है। ‘हम झारखंड की विविधता को मजबूत करना चाहते हैं। ये नेता हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करेंगे,’ उन्होंने कहा।
राज्य में सत्ताधारी झामुमो-कांग्रेस गठबंधन के सामने भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के मुद्दे हैं। भाजपा, जो 2014-19 तक सत्ता में रही, अब वापसी की तैयारी में जुटी है। ये जिला अध्यक्ष टिकट वितरण से लेकर बूथ प्रबंधन तक हर स्तर पर अहम भूमिका निभाएंगे।
विपक्ष ने इसे ‘जातिवादी रणनीति’ करार दिया, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह है। खूंटी, रांची जैसे चुनौतीपूर्ण जिलों में नए चेहरों से उम्मीदें बढ़ गई हैं।
यह कदम न केवल आगामी विधानसभा चुनावों के लिए बल्कि 2024 लोकसभा चुनावों की भी जमीन तैयार करेगा। झारखंड की सियासत में जहां पहचान की राजनीति हावी रहती है, वहां भाजपा ने सही समय पर सही दांव खेला है। आने वाले दिनों में इन 23 नेताओं की असल परीक्षा होगी।